क्यों कोई हमारे इतने करीब हो जाता है
हम साँस लेना छोड़ सकते हैं पर उसे नहीं
क्यों एक अजनबी जिसे कल तक हम कभी जानते भी नहीं थे
वो इतना खास हो जाता है कि उस पर कोई आंच आये तो सह नहीं सकते
क्यों हमारी जान से ज्यदा कीमती हो जाता है कि उसे खोने से डरते हैं
क्यों उसके पास जाने से उससे बात करने को महबुर होते हैं
क्यों वो इतना पास आ जाता है कि हमारा दिल उससे ही चलता है
ऐसा क्यों हो जाता है उसके लिए खुद को बदलने लगते हैं
जेसा वो कहे उसके अनुसार चलने लगते हैं
इन सबका एक ही जबाब क्यों कि हम उस पर खुद से ज्यदा ऐतबार हो जाता है
उसके बिना जीना दुशबार हो जाता है
हमें उससे बेतहाँ प्यार हो जाता है

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